गुरुदेवता भजनमंजरी

कमलनयन वासुदेव

घोषः

विघ्नेश्वर भगवान की जै | विद्या गणपती की जै |

श्लोकः

दामोदर गुण मंदिर
सुंदर वदनारविंद गोविंद
भवजलधि मथन मंदर
परमं दरमपनयत्वं मे |
नारायण करुणामय शरणं
करवाणि तावकौ चरणौ
इति षट्पदी मदीये
वदनसरोजे सदा वसतु ||

कीर्तनम् — 8

रागः : जेंजोटि

तालः : रूपक

कमलनयन वासुदेव
करिवरद मां पाहि
अमलमृदुल नळिन
वदनाच्युत मुदं देहि ||

जारचोर मेरुधीर
साधुजनमंदार
पाररहित घोरकलुष
भवजलधिविदूर
नारदादि गानलोल
नंदगोपबाल
वारिजासनानुकूल
मानित गुणशील
कामजनक श्यामसुंदर
कनकांबरधरण
रामदासवंदित
श्रीराजीवाद्भुत चरण

नामावलिः

मनमोहन मुरली गान लोल
श्री गिरिधर गोपाल

घोषः

विघ्नेश्वर भगवान की जै | विद्या गणपती की जै |